कृषि राष्ट्र के पोषण का मूल आधार, पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्


देश 11 June 2026
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कृषि राष्ट्र के पोषण का मूल आधार, पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए कृषि के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कृषि केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के पोषण का मूल आधार है। प्रधानमंत्री ने किसानों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके परिश्रम से ही देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है और करोड़ों लोगों का जीवन संचालित होता है।

किसानों के परिश्रम को बताया राष्ट्र की शक्ति

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “कृषि केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के पोषण का मूल आधार है। हमारे किसान भाई-बहनों का पसीना जब मिट्टी में मिलता है तो अन्न बनकर देशवासियों के जीवन को संबल देता है।” उन्होंने इसके साथ संस्कृत सुभाषितम् ‘ते कृषिं च सस्यं च मनुष्या उप जीवन्ति। कृष्टराधिरुपजीवनीयो भवति य एवं वेद॥’ भी साझा किया और पोस्ट में #12YearsOfKisanSamriddhi हैशटैग का उपयोग किया।

कृषि को बताया मानव जीवन का आधार

पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा साझा किए गए सुभाषितम् का आशय है कि खेती और फसल ही मानव जीवन के आधार हैं। जो व्यक्ति इस सत्य को समझता है, वही कृषि कार्य के महत्व को सही रूप में स्वीकार करता है और उसके माध्यम से समाज का भरण-पोषण संभव होता है। यह संदेश कृषि क्षेत्र की महत्ता और किसानों की भूमिका को रेखांकित करता है।

किसान समृद्धि पर सरकार का फोकस

प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार किसान कल्याण, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण विकास को लेकर विभिन्न योजनाओं पर जोर दे रही है। सुभाषितम् के माध्यम से उन्होंने कृषि को देश की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था की आधारशिला बताते हुए किसानों के योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

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